हमें अपनी धारणाओं पर अत्यधिक भरोसा नहीं करना चाहिए—यह बुद्ध का उपदेश है। उन्होंने हमसे पूछा, “क्या आप अपनी धारणाओं के प्रति आश्वस्त हैं?” मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप इस वाक्य को एक कार्ड पर लिखकर अपने कमरे की दीवार पर लगा दें: “क्या आप अपनी धारणाओं के प्रति आश्वस्त हैं?” आपके भीतर धारणाओं का एक नाश है। आपको इस नाश के किनारे बैठकर अपनी धारणाओं पर चिंतन करना चाहिए। बुद्ध ने कहा है कि हमारी अधिकांश धारणाएँ झूठी होती हैं। क्या आप अपनी धारणाओं के प्रति आश्वस्त हैं? यह प्रश्न आपसे ही पूछा गया है। यह जागरूकता का प्रतीक है। ~ थिच न्हाट हान