शांति की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संवादों को प्रोत्साहित करने में सहभागी बाल मीडिया की भूमिका
एक अन्वेषण
महात्मा गांधी ने कहा था, “यदि हमें इस दुनिया में सच्ची शांति प्राप्त करनी है और युद्ध के विरुद्ध वास्तविक जंग लड़नी है, तो हमें शुरुआत बच्चों से करनी होगी।” (यंग इंडिया, 19-11-1931) चूंकि प्रत्येक व्यक्ति शांति, अहिंसा और आपसी सह-अस्तित्व की संस्कृति में योगदान देने के लिए उत्तरदायी है, इसलिए बच्चों और किशोरों को संवाद में योगदान देने और रचनात्मक संघर्ष समाधान कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना अनिवार्य होगा। ये आज के जीवन कौशल शिक्षा के महत्वपूर्ण घटक हैं। इसके अलावा, आज के अति-तकनीकी संचार परिवेश में, जहां बच्चे और किशोर बहुत कम उम्र से ही संचार के विभिन्न साधनों के संपर्क में आते हैं और विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्मों में योगदान देने में सक्षम होते हैं, यह आवश्यक होगा कि उन्हें ऐसे मीडिया संदेशों का निर्माण करने में मदद की जाए जो संवादपरक प्रकृति के हों, आपसी सम्मान और समझ को बढ़ावा दें और समग्र रूप से शांति की संस्कृति में योगदान दें। यह शोधपत्र इस बात का विश्लेषण करेगा कि मीडिया साक्षरता कार्यक्रमों के अंतर्गत मीडिया प्लेटफॉर्मों के विकास में भाग लेकर और नेतृत्व करके बच्चे और किशोर शांति के लिए संवाद को कैसे प्रोत्साहित कर सकते हैं। यह शोधपत्र इस बात का भी विश्लेषण करेगा कि सहभागी बाल मीडिया प्लेटफार्मों में अहिंसक संचार का एकीकरण युवाओं के बीच शांति अभिविन्यास को बढ़ाने में कैसे मदद कर सकता है।.