हमारे दैनिक जीवन में अहिंसक संचार की भूमिका
रॉय सायंतनी द्वारा लिखित अकादमिक पत्रिका का लेख (अंग्रेजी में, 2019)
प्रज्ञान: जनसंचार पत्रिका: खंड 17, अंक 1 और 2, जनवरी-दिसंबर 2019
ऐसे समय में जब विश्वभर के समाज विभिन्न स्तरों (सामाजिक, व्यक्तिगत) पर समस्याओं का सामना कर रहे हैं, तब संचार के एक वैकल्पिक दृष्टिकोण को समझने की तीव्र आवश्यकता है जो अलगाव और दुर्भावना के भ्रम से बचने में सहायक हो। अंतर्वैयक्तिक संचार से लेकर जनसंचार स्तर तक, आत्मनिरीक्षण की प्रबल आवश्यकता है।
मौखिक और गैर-मौखिक संचार दोनों हमारे भावों, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, अहंकार, प्रभुत्व और श्रेष्ठता की भावना, या भावनाओं के अंतर को कैसे प्रभावित करते हैं, इसे समझने के लिए गहन विश्लेषण आवश्यक है। इसलिए, हमें संचार प्रक्रिया के एक वैकल्पिक दृष्टिकोण को समझने की आवश्यकता है जो हमें तनावमुक्त करे और मन की शांति प्रदान करे। यह लेख अहिंसक संचार के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालेगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को इसे दैनिक आदत और अभ्यास के रूप में अपनाने में मदद मिलेगी।